क्रांतिकारियों के मुकुटमणि वीर सावरकर

मित्रों,

आप सबके अपार स्नेह और ईश्वर की कृपा से मैं आज भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूँ | परन्तु अंतर्मन से मैं आज भी अहमदाबाद के नारणपुरा वार्ड का बूथ मंत्री और पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता हूँ | जनता और कार्यकर्ता से संवाद के बिना मेरा मन संतुष्ट नहीं होता है | पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों, अपने पाक्षिक व्यक्तिगत संवाद और सोशल मीडिया के द्वारा तो मैं आप सभी के संपर्क में हूँ | इस कड़ी को आगे बढाते हुए मैं आज यह वेबसाईट आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ | इस साईट में मेरे कार्यक्रमों के चित्र, विडियो, समाचार तो होंगे ही साथ में ब्लॉग के ज़रियें मैं समय-समय पर अनेक विषयों पर अपनी व्यक्तिगत सोंच से भी आपको अवगत करुंगा |

मैं अपना पहला ब्लॉग मेरे आदर्श और सच्चे राष्ट्रभक्त वीर सावरकर जी के चरणों में अर्पित करता हूँ |

राजनीतिक दृष्टि से अभिशप्त और सामजिक दृष्टि से बिखरे भारत ने 18वीं शताब्दी के प्रारंभ मे अपने इतिहास का नवीन युग देखा था | कहा जाता है कि अतृप्त आकांक्षाओं की पूर्ती हेतु मानव बार-बार जन्म ग्रहण करता है | यदि इस कथन में सत्यता है तो वीर सावरकर के जन्म और जीवन कहानी इस कहावत को पूर्णत: चरितार्थ करती प्रतीत होती है | 1883 में ऐसी दो महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई थी, जिन्होंने इस वर्ष को एक नवीन महत्व प्रदान कर दिया | सामाजिक पुनरुत्थान के नेता महर्षि दयानंद अपनी दैहिक यात्रा पूर्ण कर रहे थे और महान क्रांतिदूत भारत माता के सपूत वासुदेव बलवंत फड़के ने भारतीय गणराज्य का स्वप्न अपने नेत्रों में संजोए मातृभूमि से दूर अंतिम साँस ली थी | उसी वर्ष वीर सावरकर का जन्म 28 मई को रात्रि दस बजे महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित भगुर नगर में हुआ था | लगता है धार्मिक क्रांति के जनक महर्षि दयानंद और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणापुत्र श्री फड़के की दिव्य ज्योति का संगम ही वीर सावरकर के रूप में अवतरित हुआ था | 1902 में जब वह मैट्रिक के छात्र थे तो 22 जनवरी 1902 में ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की मृत्यु होने पर भारत मे होने वाली शोक सभाओं का विरोध करते हुए वीर विनायक ने उद्घोष किया था कि शत्रु देश की रानी की मृत्यु पर हम शोक क्यों मनाएं ?

किशोर अवस्था में ही वीर सावरकर ने “मित्र मेला” नामक संगठन की स्थापना की थी, जिसे बाद में “अभिनव भारत” की संज्ञा मिली | 22 अगस्त 1906 को जब वीर सावरकर पुणे में कॉलेज के छात्र थे तो वहां उन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर अपने क्रांति धर्म की आभा दर्शायी थी | उनके इस अभियान को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने भी आशीर्वाद प्रदान किया था | प्रबुद्ध स्नातक विनायक सावरकर ने एडवर्ड के राज्यारोहण के अवसर पर भारत में होने वाले उत्सवों का विरोध करते हुए उद्घोष किया थे कि “दासता का उत्सव क्यों मना रहे हो ?” 9 जून 1906 को पंडित श्याम जी कृष्ण वर्मा द्वारा प्रदत्त शिवाजी छात्रवृत्ति प्राप्त कर उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु ब्रिटेन गए थे | वहां के स्वतंत्र वायु मंडल में इंडिया हाउस को अपनी गतिविधियों का केंद्र स्थल बनाया था | वहीँ उन्होंने भारत मे ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध 1857 की सशस्त्र क्रांति का इतिहास ग्रन्थ लिखा था जिसे 1857 के “स्वतन्त्रया समर” की संज्ञा प्रदान की थी | इस ग्रन्थ के छपने से पहले ही अंग्रेज सत्ता ने इसे प्रतिबंधित घोषित कर दिया था | 1906 में वीर सावरकर लिखित इस ग्रन्थ का अंग्रेजी अनुवाद येन – केन प्रकरण हालैंड में छपा था| इसका दूसरा संस्करण भीकाजी कामा और लाला हरदयाल सरीखे प्रखर राष्ट्रभक्तों ने छपवाया था | जबकि तीसरा संस्करण सरदार भगत सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा गुप्त रूप से छपवाया गया था | यह ग्रन्थ क्रांतिकारियों के लिए गीता सरीखा प्रेरक हो गया था |

1 जुलाई 1909 को युवा क्रांति धर्मी मदन लाल धींगरा ने कर्जन वायली को गोली मार हत्या कर दी गयी थी | इस प्रसंग मैं वीर सावरकर का एक लेख लन्दन टाइम्स में प्रकाशित हुआ था | 23 मार्च 1920 को बिर्टिश सरकार की आँखों में खटक रहे वीर सावरकर को लन्दन के विक्टोरिया स्टेशन पर बंदी बना लिया गया था | उनके बड़े भाई गणेश सावरकर को देशभक्ति के पावन अपराध में बंदी बनाकर अंडमान कालापानी के क्रूर कारागार में भेजा जा चुका था | जबकि छोटे भाई नारायण सावरकर भी वहीँ बंदी जीवन बिता रहे थे |

1 जुलाई 1920 को लन्दन से भारत लाये जाने के दौरान वीर सावरकर ने सघन पहरे वाले जहाज़ से सीवर होल के रास्ते से पलायन कर 8 जुलाई 1820 को सागर संतरण कर गोलियों की बौछारों के बीच फ्रांस के तट पर पहुँच कर अपने साहस व संकल्प का अद्भुत कार्य किया था | फ्रांस की भूमि पर सावरकर जी की गिरफ्तारी को हेग के अंतर्राष्ट्रीय न्यायलय मे चुनौती दी गयी परन्तु न्याय नहीं मिल पाया |

जस-तस वीर सावरकर को भारत लाकर उनके विरुद्ध अभियोग चलाया गया और उन पर जैक्सन वध षड़यंत्र और ब्रिटिश सरकार का तख्ता पलटने के आरोप लगाए गये | 24 दिसम्बर 1920 को एक मामले मे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई | जबकि दूसरे मामले में भी 30 जनवरी 1922 आजीवन कारावास का दंड सुनाया गया | स्वतंत्रता संग्राम में दो आजीवन कारावास की सजा पाने वाले एक मात्र क्रांतिकारी वीर सावरकर को अंडमान के भयानक सैल्युलर कारागार में पहुचाया गया | इस कारागार के सात खंड थे | उसकी दूसरी मंजिल की 134 न. की कोठरी में सावरकर जी को बंदी बनाकर रखा गया था | वीर सावरकर को नारियल की रस्सी बनाने का काम तो दिया ही जाता था उन्हें तेल निकालने के लिए बैल की तरह कोल्हू में भी जोता जाता था| किन्तु उस यातनायुक्त जीवन में भी सावरकर जी की काव्य प्रतिभा का प्रस्फुरण हुआ और उन्होंने कारागार की दीवारों पर काव्य पंक्तियों का अंकन कर महाकाव्य का सृजन कर अनुपम साहस का परिचय दिया | ऐसा कष्ट सहिष्यु राजनीतिक बंदी और साहित्यकार, समग्र विश्व में वीर सावरकर के अलावा न कोई हुआ है और न ही शायद कोई होगा | लगभग 13 वर्ष के पश्चात अनेक भारतीय राष्ट्रभक्तों के प्रयास से वीर सावरकर अंडमान से भारत लाए गए | पहले उन्हें अलीपुर जेल तथा बाद में रत्नागिरी कारागार में बंदी बनाकर रखा गया | रत्नागिरी में ही वीर सावरकर ने अपने महान ग्रन्थ “हिंदुत्व” को लिखा | रत्नागिरी से उन्हें यरवदा जेल मे स्थानांतरित किया गया और यहीं से वह 6 जनवरी 1928 को कारावास से मुक्त हुए किन्तु साथ ही उन पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया गया | अन्तत: बैरिस्टर जमुनादास मेहता आदि के प्रयास से 20 मई 1936 में हुए अखिल भारत हिन्दू महासभा के अहमदाबाद अधिवेशन में वह इस संगठन के अध्यक्ष पद पर आसीन हुए | वह लगातार सात वर्ष तक हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने जाते रहे | हिन्दू महासभा अध्यक्ष के रूप मे उन्होंने तुष्टिकरण की नीति तथा भारत विभाजन के प्रयासों का डटकर विरोध किया | सावरकर जी भारत की अखंडता के प्रबल पक्षधर थे | एक राष्ट्र, एक संस्कृति भाव तथा राष्ट्रीयता ही उनका महामंत्र था | अपने जीवन में सतत संघर्ष करते और अवरोधों को झेलते इस महान राष्ट्रभक्त ने जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से 22 जून 1942 भेट की तो उन्होंने ने ही नेताजी को जापान जाकर आजाद हिन्द सेना की कमान सँभालने का परामर्श दिया | 25 अगस्त 1947 को वीर सावरकर ने सावरकर सदन मुंबई मे भगवा ध्वज के साथ तिरंगा राष्ट्रध्वज भी फहराया था | उन्होंने उस प्रसंग में पत्रकारों से हुई वार्ता मे कहा था मुझे स्वराज्य प्राप्त होने की प्रसन्नता है परन्तु भारत खंडित होने की पीड़ा भी है |

मई 1952 को पुणे की विशाल सभा में अभिनव भारत संगठन को उसका उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति पूर्ण हो जाने पर भंग कर देने की घोषणा भी कर दी थी | 1957 मे देश की राजधानी दिल्ली मे आयोजित 1857 के भारतीय स्वाधीनता संग्राम के शताब्दी समारोह में वह मुख्य वक्ता रहे थे | इस अवसर पर रामलीला मैदान में सुविशाल जन समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था यदि हमारा राष्ट्र यदि बुद्ध की पूजा करना चाहता है तो उसे युद्ध की भी सिद्धता रखनी होगी | यहीं पर उन्होंने सैनिकीकरण पर बल देते हुए युवा पीढ़ी से सेना में योगदान करने का आह्वान किया था | एक महान राष्ट्रभक्त के साथ साथ सावरकर जी एक अद्वितीय समाज सुधारक भी थे, कम ही लोग जानते हैं कि अस्पृश्यता के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले वह पहले व्यक्ति थे | उन्होंने मंदिरों में दलित समाज के प्रवेश के लिए काफी संघर्ष किया, जिसके लिए उन्हें अपने समाज और जाति का विरोध भी झेलना पड़ा |

बढती आयु बिगड़ रहे स्वस्थ्य के कारण वीर सावरकर ने स्वतः सक्रिय राजनीति से संन्यास ले कर 2 फरवरी 1966 को उन्होंने मृत्यु पर्यंत उपवास का निर्णय लिया | इस दौरान उन्होंने औषधि और उपचार से सर्वथा इन्कार कर दिया, बीच – बीच में पानी के घूट पीकर कर 26 फरवरी 1966 को वह अपनी नश्वर काया का परित्याग कर अनन्त यात्रा पर प्रस्थान कर गये | अपने सपने की धरोहर ही वे राष्ट्र को सौप गए है | उनका सपना उन्ही के शब्दों मे यह था | मेरे सपनो का भारत एक ऐसा लोकतंत्रीय राज्य है, जिससे सभी धर्मो और मत-मतातंरों के अनुयायियों के साथ पूर्ण समानता का व्यवहार किया जायेगा | जहां पर किसी को दुसरे पर अधिपत्य का अवसर नहीं रहेगा”| वीर सावरकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के पक्षधर थे | स्वतंत्र भारत में भी वीर सावरकर सत्ताधीशों द्वारा उपेक्षित ही रहे | यहाँ तक कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय संसद में उनके तैलचित्र के लगाने का एक राजनीतिक विचार के अनुयायिओ ने विरोध ही किया था |

मित्रों आज भी जब मैं अपने आदर्श वीर सावरकर जी के बारे में अंग्रेजो द्वारा दी गयी यातनाओं और स्वतंत्र भारत में उनकी उपेक्षा के बारे में सोचता हूँ तो आँखों में आंसू आ जाते और मन रौद्र हो जाता है | यदि स्वतंत्र भारत के राजनैतिक कर्णधारों ने सावरकर जी के जीवन और उनकी सोंच से शिक्षा लेकर राष्ट्र निर्माण किया होता तो आज देश इस विषम परिस्थित से नहीं गुजर रहा होता | आइये मेरे साथ संकल्प करे कि हम सब वीर सावरकर के सपनों के भारत के निर्माण के सहभागी बनेगे |

सावरकर जी एक महान  राष्ट्रभक्त, अद्वतीय स्वतंत्रता सेनानी, अद्भुत समाज सुधारक, महान लेखक, भाषा शास्त्री, अनुकर्णीय युगद्रष्टा और हिन्दू संस्कृति के प्रखर समर्थक थे | करोड़ों राष्ट्रभक्तों में ढूँढने पर ही शायद एक सावरकर मिले |

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28 Comments

  • Rajeev K Singh Posted September 26, 2015 8:43 am

    Nice and very informative blog on वीर सावरकर जी . We need pople like वीर सावरकर जी to make "Hindustan" best in the world.
    Jai Hind.. Jai Bharat…

    • AJAY SHARMA Posted October 3, 2015 11:49 am

      It only happens only in INDIA. Bhart is still a VISHWAGURU just given innovators opportunity. ………..For first time 2265 years old Archimedes principle, Newton’s laws, 310 years old Einstein’s E=mc2 generalized. …..The new theories are published in AMERICAN European JOURNALS after approval of experts. Hon’ble Minister of Science and Technology Dr Harsh Vardhan has encouraged and sent Ajay Sharma’s books ……..*Beyond Newton and Archimedes* and ……*Beyond Einstein and E=mc2*….to Secretary Science and Technology Prof. Ashutosh Sharma ……… The books are with department since past EIGHT months. Ajay Sharma request Hon;’ble Prime and Minister of Science and Technology to arrange a seminar on the work……….AJAY SHARMA will reply questions of experts nominate by DST in WRITING. …….What else Ajay Sharma can do? The contents of books will make INDIA superpower in fundamental laws of science. Mob. 94184 50899 www(dot)AjayOnLine(dot)us

    • Jatinder kumar Posted October 10, 2015 2:54 pm

      A great artical about the great freedom Fighter savarkar ji

  • Sandip Shelake Posted September 26, 2015 9:52 am

    Shri Amit Bhai Shah aapko mera namskar,agar comment ke madhyam se mai aapko sarkar ke bare me feedback diya to sahi hoga kya? krupaya aap muze bataye mera Email Id [email protected] hai thanks

  • Sandip Shelake Posted September 26, 2015 9:54 am

    Bahut khub Amitbhai.muze aap me veer Savarkaraji Aur Arya Chanakya ki chhavi najar aati hai

  • naresh Posted September 26, 2015 4:26 pm

    BJP as a political party to rule over india has a great significance. this is second time after BAJPAYEE govt.
    Almost 70 years since independence.Only one complete turn( 5year) was completed . we t he people should now be ready to see about every thing that congress govt stopped

  • Omprakash Posted September 26, 2015 6:15 pm

    Respected Amit ji, very happy u started the blog. Also happy to read about veer sawarkar with different perspective I have read Ven small. Keep inspiring us so that v too contribute in the nation building process.

  • P Sharma Posted September 26, 2015 7:52 pm

    BJP is going from strength to strength.Leadership seems in perfect co-ordination.A perfect balance is visible even with RSS. House is in order.An efficient bureaucracy is now what people are looking forward to.Please ensure that this does not decay into a party of sycophants like Congress.If you can initiate…think of how educated nationalist youth gets into political arena.For so long the nation has been burdened with jokers at the helm of affairs who plundered my nation and robbed people of basic needs of living.Find more Savarkars,Patels and Bhagat Singhs in 125 crore…that will truly be a tribute to true heroes of our Independence Struggle …and this will lay path to our pride ,growth and glory….irreversible and irrevocable.The time has come.

  • Rahul Posted September 26, 2015 10:29 pm

    A great article about the great freedom fighter ‘Swatantratyaweer Veer Damodar Savarkar’ . Its a matter of great pride that someone in Amit Shah’s position acknowledges the heroic deeds of this man. I hope more such souls are born in Bharatvarhsa and strive to make this ancient civilization stronger and keep pace with the times. I applaud the BJP leadership and karyakartas for a good job governing so far and hope that like Chanakya they will create a long lasting legacy and an institution that will stand the test of time and continue to guide and protect the interest of every Indian. I have no doubt that you will be successful in your pursuits Mr. Shah. Praying for a strong second term with LS and RS majority and the future passage of Uniform Civil Code. Keep up the work..

  • Amar Mallia Posted September 27, 2015 5:02 am

    Jai hind nice article sir. Congratulations to you and Modiji for completing a successful one year at the centre. The expectation from this government is ever increasing and that’s a good sign as you expect only from people who can deliver. So all the best and also please do let me know how we can contribute to the same.

  • s k mishra Posted September 27, 2015 5:18 am

    Inspirational.

  • Vinayak Hirlekar Posted September 27, 2015 6:02 am

    Very nice & thoughtful article. Dear Amit ji, by starting a blog site of your own, will allow you to articulate your thoughts & policies to the, people at large, on a regular basis. By aligning towards, ‘Patriotic, Knowledge & Logic based, driven by strong Sense of Justice & steeped in RAW COURAGE’, the fundamental Thoughts & Philosophy of Veer Vinayak Damodar Savarkar ji, you have made an AUSPICIOUS BEGINNING of this Blog Site. Nothing could have been more appropriate and more visionary. May Lord Vinayaka bless you and our Prime Minister Modi and may under both of your Leadership Maa Bharati Achieves its FORMER GLORY with Peace, Prosperity, & Justice to all its children. Vande Mataram!

  • A Posted September 27, 2015 6:44 am

    Please try to project Shivaji and his son Sambhaji maharaj as the real heroes who laid thier lives for the hindu dharma. Also please read Sambhaji maharaj’s history, he was tortured more than Savarkar.

    • Capt.Salim A Chagla Posted December 2, 2015 12:42 pm

      amitshah be SECULAR !

  • Milind khanolkar Posted September 27, 2015 8:46 am

    Dear Amitji,
    Great to see that you have chosen veer savarkar’s life and thoughts for your first blog. World specially India is now slowly acknowledging veer savarkar’s gigantic contribution and patriotism in true spirit. Veer savarkar is a true inspiration in itself for young minds whether oratory,thoughts, vision, leadership or poetry. Request you, Modiji & entire top bjp leadership to honour "BHARAT RATNA"to this great son of india which will be fitting tribute to his work,

    Thanks & Regards,

  • prashant Posted September 27, 2015 9:53 am

    veer savarkarji ki jay….

  • Ashok Kumar Misra Posted September 27, 2015 11:48 am

    Dear Sir,
    Thanks for thinking " amitshah.co.in"
    I grateful to see that you have gone on Veer Savarkar’s life and works , on your first address to here. India is now s acknowledging Savarkar’s contribution and patriotism. Veer Savarkar is a real inspiration of young’s, and rich in thoughts, vision, leadership. We, in your leadership to see " Honour "BHARAT RATNA" to this Great Son of India.
    Kind Regards,

  • shivdeep singh Posted September 28, 2015 7:53 am

    Bahut hi badhiya shuruwat h …. kudos to u sir…. bahut acha laga Veer Sawarkar jee ke baare me padh ke… Hoping u continue to enlighten us with these kind of articles…..

  • Mahesh Belwalkar Posted September 28, 2015 10:15 am

    सकल जागामधि छान I अमुचे प्रियकर हिंदुस्थान
    केवळ पंचप्राण I आमुचे सुंदर हिंदुस्थान II धृ II

    बहुत पाहिले बहुत ऐकिले देश परि ते सान
    सान मिसर पाताल आंग्लभू सान चीन जापान

    बहुत गिरि, परि तुझाच गिरिवर हिमालयाचा मान
    कवण नदी हे श्रीगंगेसम पूत-सुधाजल-पान

    कस्तूरी-मृग-परिमल-पूरित जिचे फुलावे रान
    प्रभात-काली कोकिल-किलकिल-कूजित आम्रोद्यान

    यज्ञ-धूम-सौगंध मनोहर जिचे सामरव-गान
    ऐकुनी येती जिथे कराया देव सोमरसपान

    कालिदास कवि गाती, गौतम शिकविति सांख्यद्यान
    म्लेच्छ-विनाशक विक्रम दे तुज स्वातंत्र्यश्रीदान

    जिजा जन्म दे शिवा जिच्यास्तव गुरु पुत्रांचे प्राण
    जिच्यास्तवचि त्या कुमारिकांसी विस्तवांत ये न्हाण

    तुझ्या जलांही अनंत पितरां दिले तीलांजलि-दान
    पुण्यभूमि तू ! पितृभूमि तू ! तू अमुचा अभिमान

    जननी ! जगत्त्रयि शक्त कोण जो करिल तुझा अपमान
    प्राणदान-संसिद्ध असुनि त्वत-त्रिदश-कोटि संतान ?

    जननी ! तुझ्या सन्मान- राक्षणी अर्पु रणी हे प्राण
    शत्रूकंठ भंगोनि घालु तुज दारुण रक्तास्नान

  • Sumiit Sinha Posted September 30, 2015 6:55 pm

    I will say two things. 1st Bharat Mata ki Jay.

    Second is please change this complicated captcha. put simple as people studied with vernacular medium will get confused of this complicated image match system. Make it simple, please it’s my request.

  • Prashant Posted October 2, 2015 4:17 am

    Thanks and great steps

  • Suhas Vasant Sahasrabudhe Posted October 2, 2015 7:06 am

    Congratulations on this excellent article on Veer Savarkar, whom Congress has always hated. Your article very concisely describes his greatness, which is virtually unknown to all Indians. I request you now to put in your best efforts to confer ‘BHARAT RATNA’ on him and to disseminate his philosophy as widely as possible all over India.

  • Manoj Kushwah Posted October 5, 2015 10:49 am

    Well said sir….a must read article for every Savarkar lover

  • Capt.Salim A Chagla Posted December 2, 2015 12:44 pm

    BJP WE VOTED ! SO BE SECULAR !
    Capt.s.chagla

  • Dr. Rohan kulkarni Posted January 21, 2016 5:20 am

    We need more V. Sawarkar today..
    great initiative..
    hats off to amit ji..
    keep up…

  • Milind Patki Posted March 5, 2016 1:33 pm

    जयोऽस्तु ते

    जयोऽस्तु ते! जयोऽस्तु ते!
    श्री महन्मंगले शिवास्पदे शुभदे
    स्वतंत्रते भगवती त्वामहम् यशोयुतां वंदे!

    राष्ट्राचें चैतन्य मूर्त तूं नीती संपदांची
    स्वतन्त्रते भगवती श्रीमती राज्ञी तूं त्यांची
    परवशतेच्या नभांत तूंचि आकाशीं होशी
    स्वतन्त्रते भगवती चांदणी चमचम-लखलखशी

    गालावरच्या कुसुमीं किंवा कुसुमांच्या गालीं
    स्वतन्त्रते भगवती तूंच जी विलसतसे लाली
    तुं सूर्याचें तेज उदधिचें गांभीर्यहिं तूंचि
    स्वतन्त्रते भगवती अन्यथा ग्रहणनष्टतेची

    मोक्ष-मुक्ति हीं तुझींच रूपें तुलाच वेदांतीं
    स्वतन्त्रते भगवती योगिजन परब्रह्म वदती
    जें जें उत्तम उदात्त उन्नत महन्मधुर तें तें
    स्वतन्त्रते भगवती सर्व तव सहकारी होती

    हे अधमरक्तरञ्जिते सुजनपूजिते श्री स्वतन्त्रते
    तुजसाठि मरण तें जनन
    तुजवीण जनन तें मरण
    तुज सकल-चराचर-शरण चराचर-शरण

    -विनायक दामोदर सावरकर

  • Ranjit Vaidya Posted April 21, 2016 8:58 pm

    Like you, I am also an ardent follower and admirer of Veer Savarkar. You have written very nice and detailed blog above him. I wish you & your party will always follow Savarkar’s ideology And path shows by him to the nation. Thank you, with best wishes!!!

  • Captain Salim Chagla Posted March 8, 2017 10:57 am

    amit shah well 1st me I am a secular indian, have voted for BJP But
    a] why gas cylinder increasing Rs.744/-..was 1 month Rs.520, we were thinking that the 60% poverty plus middle-class are telling lie’s;…every Indian waiting for 15lacs each 1.27 billion’s – in pm.n.modi’s "story-book"

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