मातृप्रेम का एक गांव-‘वात्सल्य ग्राम’

मातृप्रेम का एक गांव-‘वात्सल्य ग्राम’

हाल ही में १७ फरवरी २०१६ को वात्सल्य ग्राम के चतुष्चरण लोकार्पण पर जाने का सौभाग्य मिला। दीदी मां साध्वी ऋतंभरा द्वारा किये जा रहे अद्भुत कार्यों को निकट से मैं इस अवसर पर देख पाया। संन्यास धर्म का पालन करते हुए दीदी मां साध्वी ऋतंभरा जी ने जिस प्रकार का सेवा कार्य खड़ा किया है वह उनके अंदर विद्यमान अगाध वात्सल्य के बिना संभव नहीं था। हमारे देश की एक परंपरा रही है कि ऋषि, महर्षि, साधु, संन्यासी एवं तपस्वी निरंतर जन-जन का मार्गदर्शन कर अपने आचरण एवं कर्तृत्व से समाज के आधार स्तंभ बनते रहे हैं। चाहे राजा हो या प्रजा, धनवान हो या गरीब, विद्वान हो या निरक्षर, हर किसी को उनके जीवन का लक्ष्य तथा अपने कार्य के प्रति उन्मुख कर उनमें आध्यात्मिकता का भाव जगा समाज को संवेदनशीलता एवं भाईचारा के अटूट बंधन में बांधने का कार्य हमारे तपस्वी-संन्यासियों ने प्राचीन काल से ही किया है। युगों-युगों से प्रवाहित निःस्वार्थ समर्पण की इस अखंड धारा से सिंचित हमारा देश ऐसे ही प्रकाश स्तंभों से प्रेरणा पाकर निरंतर वर्तमान की समस्या का सामाधान ढूंढ़ते हुए एक उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। वात्सल्य ग्राम आकर उसी परंपरा से साक्षात्कार करने का एक अवसर भगवत्-कृपा से मुझे प्राप्त हुआ जिसके लिए मैं दीदी मां का सदा आभारी रहूंगा।

मानव मात्र की सेवा परमपिता परमेश्वर की सेवा के समतुल्य है। इसी सूत्रवाक्य को वास्तविकता के धरातल पर उतारने के लिए दीदी मां साध्वी ऋतंभरा जी ने वात्सल्य ग्राम जैसे अनूठे प्रकल्प की कल्पना की। दीदी मां उन सैकड़ों बच्चों की आंखों में खुशियां बनकर झिलमिलाती हैं जो कालचक्र के वशीभूत होकर मां की ममतामयी गोद से वंचित हुए। वे उन युवतियों का स्वाभिमानपूर्ण संबल हैं, जो सामाजिक विडम्बनाओं के चलते जीवन के दोराहे पर आ खड़ी हुईं। दीदी मां उन वृद्ध माताओं का स्नेहपूर्ण आलिंगन हैं जिन्हें अपने पितरों का तर्पण करने वाली संतानों ने वृद्धाश्रमों की ‘सुविधापूर्ण’ दीवारों के भीतर कैद कर देने का ताना-बाना रचा। अनाथाश्रम, नारी निकेतन और वृद्धाश्रम जैसी संस्थाओं की दुर्दशा देखकर निराश्रित शिशुओं, बहनों और वृद्धजनों को वात्सल्य की छांव प्रदान के लिए ही वात्सल्य ग्राम की स्थापना की गई।

वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन के गोकुलम् में बसे प्रत्येक परिवार में पांच बालिकाएं, दो बालक, एक मां, मौसी एवं नानी हैं, जो आपस में रक्त सम्बन्ध न होते हुए भी प्रेम और वात्सल्य की डोर से एक दूसरे से बंधे है। यहां पलने वाले सैकड़ों बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके, इसके लिए वात्सल्य ग्राम परिसर में ही सम्विद गुरूकुलम् अन्तर्राष्ट्रीय विद्यालय, आनंद अनुभूति, क्रीड़ांगन, छात्रावास एवं संस्कार केन्द्र की स्थापना की गई है। इस प्रकार इस प्रेम और वात्सल्य की भूमि पर रहने वाले प्रत्येक शिशु का एक कर्मठ, अनुशासित एवं सक्षम नागरिक के रूप में विकास होता है।

वात्सल्य ग्राम में स्थित अन्य प्रकल्पों में चिकित्सा के क्षेत्र में ‘स्वस्ति चिकित्सालय’ ने लोगों के कष्टों को हरने का अनुकरणीय कार्य किया हैं। वात्सल्य ग्राम के द्वारा नेत्र चिकित्सा शिविर एवं पोलियो ऑपरेशन शिविर जैसे अनेकानेक आयोजनों के माध्यम से हजारों लोगों को लाभान्वित किया हैं। सन्त निवास एवं मीरा माधव निलयम अतिथिगृह प्रमुख हैं जो मानव सेवा के लिए सदैव तत्पर हैं। वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन में निर्मित होने वाला समविद् गुरुकुलम् अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय गुरुकुल पद्धति पर आधारित है यहां सुसंस्कारित वातावरण, आध्यात्मिक मार्गदर्शन में रहकर आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा ग्रहण किया जा सकेगा। सुव्यवस्थित विद्यालय भवन, विज्ञान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, कम्प्यूटर लैब, वीडियो तथा ऑडियो उपकरणों की उन्नत शृंखला के साथ योगासन, व्यायाम एवं मानसिक दक्षता को बढ़ाने हेतु समय-समय पर आवश्यक प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा।

वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन में स्थित संस्कार केन्द्र ‘कृष्णा ब्रह्मरतन विद्या मंदिर’ में अभावग्रस्त, निर्धन एवं अक्षम परिवारों के बच्चों को समुचित निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पुस्तकें, भोजन, अन्य सुविधाएं व उनके घरों से विद्यालय तक आने जाने की व्यवस्था भी की गई है। प्रकृति बच्चे के जीवन की प्रथम पाठशाला होती है। उसकी हरीतिमा, नदी, पर्वत, आकाश और पशु-पक्षियों को देखकर नन्हें मानव मन में कौतुहल जागता है। जिज्ञासु मन और विकास को ध्यान में रखते हुए वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन में ‘नन्हीं दुनिया’ का निर्माण किया गया है। इसका सुन्दर प्राकृतिक वातावरण बच्चों को सहज रूप में ही प्रकृति के अनेक रहस्यों से परिचित करवाता है। स्वस्थ शरीर में ही संकल्पवान मन का निवास होता है। विभिन्न प्रकार के खेलकूद केवल शरीर को ही मजबूत नहीं बनाते, बल्कि नैतिक बल को भी सशक्त बनाते हैं। देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिभाएं मिल सकें, इसके लिए वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन में खेलकूद अकादमी की स्थापना की गई है। बच्चे के दैनंदिनी जीवन में संस्कारों का बहुत महत्व है। सुसंस्कार जीवन की दिशा में आमूलचूल परिवर्तन कर देते हैं। भारतीय जीवन मूल्यों एवं आधुनिक शिक्षण पद्धति का संगम विद्यार्थियों को समग्र विकास की ओर ले जा सके…. ‘‘संस्कार वाटिका’’ इसी भावना का कार्यरूप है। यहां वैदिक विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में बच्चे यज्ञ, कर्मकाण्ड एवं प्रवचन आदि संस्कारपूर्ण नैतिक शिक्षा से परिचित होते हैं।

उपनिषद् का वाक्य है कि पूर्ण से मात्र पूर्ण ही उत्पन्न हो सकता है। अतः इस सृष्टि में जो भी है वह पूर्ण, श्रेष्ठ व उत्तम है। उसमें किसी भी प्रकार की कमी या त्रुटि देखना एक दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन वास्तविकता नहीं। इस संसार में जिसने भी जन्म लिया है वह उत्तम है किन्तु कई बार देखा गया है कि कुछ बच्चे जन्म से ही किसी मानसिक व शारीरिक क्षमता में विशिष्ट एवं दिव्यांग से युक्त होते हैं। उनकी इन विशिष्ट क्षमताओं को न पहचानकर कई बार माता-पिता स्वयं ही अपने इन संतानों को बोझ समझकर असहाय छोड़ देते हैं। वहीं यदि बच्चा परिवार में आया है तो उसे बिना किसी पालनाघर में छोड़े, प्रयत्नपूर्वक उसके ठीक हो जाने तक सेवा-सुश्रुसा में उनके माता-पिता को कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। वात्सल्य पालनाघर के ऐसे ही बच्चों को नवजीवन प्रदान करने के लिए वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन में विशेष बच्चों के स्कूल वैशिष्ट्यम् (आवासीय एवं पुनर्वास केन्द्र) की स्थापना की गई है। इसके अलावा वात्सल्य मंदिर (पालनाघर) ज्वालानगर, दिल्ली, परमशक्ति पीठ, ओंकारेश्वर (म.प्र.), युगचेतना वात्सल्य पीठ, नालागढ़ (हि.प्र.), वात्सल्य ग्राम, सिजई (म.प्र.) जैसे प्रकल्प चल रहे हैं।

एक निष्काम कर्मयोगी के रूप में दीदी मां जी की मानवसेवा यात्रा तीव्रतम् गति से जारी है। उनकी इस यात्रा में प्रतिदिन हजारों लोग जुड़ रहे हैं। सहयोग के हजारों हाथ उनके स्वप्न को साकार करने के सृजन में संलग्न हैं। वात्सल्य ग्राम के पावन उद्देश्यों के पूर्ण रूप से निर्वहन के लिए इन प्रकल्पों को आपके सहयोग की आवश्यकता है। वात्सल्य ग्राम के द्वारा बेटियों के सर्वांगीण विकास के लिए समय-समय पर अखिल भारतीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सीमा पर खड़ा प्रहरी जब अपनी आंखों में उदासी लिए अपनों के इन्तजार में रहता हैं, तब वात्सल्य ग्राम की नन्हीं बेटियां राष्ट्र रक्षा सूत्र बंधन यात्रा के जरिए अपना स्नेह सूत्र उनकी सूनी कलाइयों पर बांधकर प्रतिवर्ष उनको खुशी का अमूल्य उपहार देती हैं। वहीं वनवासी समाज में राष्ट्रीय चेतना एवं शिक्षा के विकास के लिए दीदी मां जी ने वात्सल्य गंगा अभियान के द्वारा हजारों बेटियों का आह्वान किया, जो ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए इस पुनीत कार्य के सफल क्रियान्वयन में अपने जीवन को आहूत करने के लिए आगे आई हैं। पूज्या दीदी मां जी ने कन्या भू्रण हत्या के विरुद्ध देशव्यापी जनजागरण अभियान प्रारम्भ किया। सम्पूर्ण भारत की विभिन्न लाखों महिलाएं लिखित रूप से संकल्पित हुईं और इस अभियान को शक्ति प्रदान की। यह आंदोलन सम्पूर्ण देश में अनवरत जारी है।

हमारे देश की परंपरा है कि संन्यासी संन्यास तो लेता है, परंतु समाज की समस्याओं से संन्यास नहीं लेता तथा समाज का पग-पग पर मार्गदर्शन संन्यास-धर्म का अभिन्न अंग है। दीदी मां ने युगों-युगों से चली आ रही उसी परंपरा का पालन कर मानवता के समक्ष त्याग, समर्पण एवं संवेदनशीलता का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज जब अद्भुत जनादेश के साथ देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गरीबी, अशिक्षा एवं बेरोजगारी को दूर कर भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं, तब उस समय दीदी मां के द्वारा किया गया कार्य सब के लिए एक नई प्रेरणा का केन्द्र बन रहा है तथा देश की आध्यात्मिकता और सामाजिक सरोकार के संगम से नई ऊर्जा निकल रही है। संन्यासियों से हमारा समाज समाधान पाता रहा है, देश की समस्याओं के निराकरण का मार्ग हमारे ऋषि-महर्षि बताते रहे हैं और आज भी समाज की अपेक्षा संन्यासियों से समाधान एवं मार्गदर्शन की रहती है। दीदी मां का यह प्रेरणास्पद कार्य आने वाले दिनों में संन्यासी धर्म का पालन करने वालों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करेगा।

दीदी मां ने अपने अद्भुत कार्यों से भारत की इस प्राचीन परंपरा को पुनर्स्थापित किया है। उनके इस पुनीत कार्य से युगों – युगों से चली आ रही परंपरा को बल मिला है तथा लोगों को समाज कल्याण, देशप्रेम एवं संवेदनशीलता की ओर उन्मुख किया है। मैं स्वयं इस कार्य को देखकर अभिभूत हूं तथा दीदी मां का हृदय से आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इस पुनीत कार्य से जुड़ने की प्रेरणा दी है। मैं हमेशा इस पवित्र कार्य से जुड़ा रहूंगा। मैं सब से अनुरोध करता हूं कि एक बार वात्सल्य ग्राम जाकर जरूर देखें और इस पुनीत कार्य के लिए इसके सभी प्रकल्पों में मुक्त हृदय से सहयोग करें। दीदी मां ने जिस तरह से इस अद्भुत कार्य को सिद्ध किया है उसके लिए मैं उनके श्रीचरणों में सादर वंदन करता हूं।

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